जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। माना जाता है कि उनका जन्म अधर्म को समाप्त कर धर्म की स्थापना के लिए हुआ था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में देवकी और वसुदेव के घर हुआ था। उस समय राजा कंस का अत्याचार चरम पर था।
कंस से बचाने के लिए वसुदेव नवजात कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल ले गए और उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद बाबा ने किया।
श्रीकृष्ण हमें सिखाते हैं कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें आएं, हमें साहस, धैर्य और बुद्धि के साथ उनका सामना करना चाहिए।
श्रीकृष्ण का संदेश है—अपने कर्म पर ध्यान दो और सही रास्ते पर चलते रहो। परिणाम की चिंता किए बिना ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
जन्माष्टमी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि यह याद दिलाती है कि जब भी जीवन में अंधेरा हो, सही कर्म और सच्चाई का रास्ता ही रोशनी बनता है।